Ramesh Kumar
May 15, 2025
Very peaceful and divine experience. The arrangements were excellent.

Vrindavan, Uttar Pradesh|♙ Lord Krishna (Banke Bihari)
बाँके बिहारी मंदिरबाँके बिहारी मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध और पूजनीय वैष्णव मंदिरों में से एक है। यह उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद स्थित वृंदावन में स्थित है और भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप "बाँके बिहारी" को समर्पित है। "बाँके बिहारी" नाम का अर्थ है त्रिभंग मुद्रा (तीन स्थानों से मुड़ी हुई मनमोहक मुद्रा) में खड़े भगवान श्रीकृष्ण, जो अपनी दिव्य सुंदरता, मधुर मुस्कान और आकर्षक स्वरूप से भक्तों का मन मोह लेते हैं। इस मंदिर की स्थापना वर्ष 1864 में महान संत, कृष्ण भक्त एवं प्रसिद्ध संगीतज्ञ स्वामी हरिदास जी ने की थी। मान्यता है कि स्वामी हरिदास जी की गहन भक्ति, साधना और मधुर भजन-कीर्तन से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण ने निधिवन में श्री बाँके बिहारी के दिव्य विग्रह के रूप में प्रकट होकर भक्तों को दर्शन दिए। बाद में उसी दिव्य विग्रह को वर्तमान मंदिर में विधिवत स्थापित किया गया। बाँके बिहारी मंदिर की सबसे अनोखी विशेषता इसकी दर्शन व्यवस्था है। यहाँ भगवान के सामने लगा पर्दा (झांकी) कुछ-कुछ क्षणों के अंतराल पर बार-बार खोला और बंद किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि श्री बाँके बिहारी की मनमोहक और करुणामयी दृष्टि इतनी प्रभावशाली है कि यदि भक्त लगातार उनके दर्शन करें तो वे भगवान की दिव्य लीला में पूरी तरह तल्लीन हो सकते हैं। इसी कारण यह विशेष परंपरा सदियों से आज भी निभाई जा रही है। प्रतिदिन भगवान बाँके बिहारी का अत्यंत भव्य श्रृंगार किया जाता है। उन्हें सुंदर एवं आकर्षक वस्त्र, बहुमूल्य आभूषण तथा ताजे पुष्पों से सजाया जाता है। दिनभर विभिन्न प्रकार की सेवाएँ, आरतियाँ और भोग अर्पित किए जाते हैं, जिनका दर्शन करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। यह मंदिर विशेष रूप से होली, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, झूलन उत्सव, राधाष्टमी और शरद पूर्णिमा जैसे पर्वों पर अत्यंत भव्य रूप धारण कर लेता है। विशेषकर फूलों की होली यहाँ विश्वभर में प्रसिद्ध है, जिसमें भगवान पर रंगों के साथ-साथ सुगंधित पुष्पों की वर्षा की जाती है। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में एकत्र होकर भक्ति, संगीत और उत्साह के साथ इस दिव्य उत्सव का आनंद लेते हैं। हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक बाँके बिहारी मंदिर के दर्शन के लिए वृंदावन पहुँचते हैं। मंदिर तक जाने वाली संकरी गलियाँ फूलों, प्रसाद, मिठाइयों, पूजा सामग्री और धार्मिक स्मृति-चिह्नों की दुकानों से सजी रहती हैं, जो वृंदावन की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को और भी जीवंत बनाती हैं। आज बाँके बिहारी मंदिर ब्रज क्षेत्र की भक्ति परंपरा, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत का एक अमूल्य केंद्र है। यह मंदिर न केवल भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों के लिए आस्था का प्रमुख स्थान है, बल्कि भारतीय संस्कृति, संगीत, भक्ति और सनातन परंपरा का भी एक अद्भुत प्रतीक माना जाता है।
Today’s Darshan
05:45 AM - 06:15 AMOpen NowMangala Aarti
3:00 AMDailyBest Time to Visit
Oct – MarPleasant WeatherAvg. Visit Duration
1 – 2 HoursApprox.बाँके बिहारी मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध और पूजनीय वैष्णव मंदिरों में से एक है। यह उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद स्थित वृंदावन में स्थित है और भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप "बाँके बिहारी" को समर्पित है। "बाँके बिहारी" नाम का अर्थ है त्रिभंग मुद्रा (तीन स्थानों से मुड़ी हुई मनमोहक मुद्रा) में खड़े भगवान श्रीकृष्ण, जो अपनी दिव्य सुंदरता, मधुर मुस्कान और आकर्षक स्वरूप से भक्तों का मन मोह लेते हैं।
इस मंदिर की स्थापना वर्ष 1864 में महान संत, कृष्ण भक्त एवं प्रसिद्ध संगीतज्ञ स्वामी हरिदास जी ने की थी। मान्यता है कि स्वामी हरिदास जी की गहन भक्ति, साधना और मधुर भजन-कीर्तन से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण ने निधिवन में श्री बाँके बिहारी के दिव्य विग्रह के रूप में प्रकट होकर भक्तों को दर्शन दिए। बाद में उसी दिव्य विग्रह को वर्तमान मंदिर में विधिवत स्थापित किया गया।
बाँके बिहारी मंदिर की सबसे अनोखी विशेषता इसकी दर्शन व्यवस्था है। यहाँ भगवान के सामने लगा पर्दा (झांकी) कुछ-कुछ क्षणों के अंतराल पर बार-बार खोला और बंद किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि श्री बाँके बिहारी की मनमोहक और करुणामयी दृष्टि इतनी प्रभावशाली है कि यदि भक्त लगातार उनके दर्शन करें तो वे भगवान की दिव्य लीला में पूरी तरह तल्लीन हो सकते हैं। इसी कारण यह विशेष परंपरा सदियों से आज भी निभाई जा रही है।
प्रतिदिन भगवान बाँके बिहारी का अत्यंत भव्य श्रृंगार किया जाता है। उन्हें सुंदर एवं आकर्षक वस्त्र, बहुमूल्य आभूषण तथा ताजे पुष्पों से सजाया जाता है। दिनभर विभिन्न प्रकार की सेवाएँ, आरतियाँ और भोग अर्पित किए जाते हैं, जिनका दर्शन करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।
यह मंदिर विशेष रूप से होली, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, झूलन उत्सव, राधाष्टमी और शरद पूर्णिमा जैसे पर्वों पर अत्यंत भव्य रूप धारण कर लेता है। विशेषकर फूलों की होली यहाँ विश्वभर में प्रसिद्ध है, जिसमें भगवान पर रंगों के साथ-साथ सुगंधित पुष्पों की वर्षा की जाती है। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में एकत्र होकर भक्ति, संगीत और उत्साह के साथ इस दिव्य उत्सव का आनंद लेते हैं।
हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक बाँके बिहारी मंदिर के दर्शन के लिए वृंदावन पहुँचते हैं। मंदिर तक जाने वाली संकरी गलियाँ फूलों, प्रसाद, मिठाइयों, पूजा सामग्री और धार्मिक स्मृति-चिह्नों की दुकानों से सजी रहती हैं, जो वृंदावन की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को और भी जीवंत बनाती हैं।
आज बाँके बिहारी मंदिर ब्रज क्षेत्र की भक्ति परंपरा, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत का एक अमूल्य केंद्र है। यह मंदिर न केवल भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों के लिए आस्था का प्रमुख स्थान है, बल्कि भारतीय संस्कृति, संगीत, भक्ति और सनातन परंपरा का भी एक अद्भुत प्रतीक माना जाता है।
Temple Type
Vaishnavite
Festivals
Janmashtami, Holi, Jhulan Yatra
Mangala Aarti
05:45 AM - 06:15 AM
Shringar Aarti
08:00 AM - 09:00 AM
Rajbhog Aarti
11:00 AM - 12:00 PM
Sandhya Aarti
05:30 PM - 06:00 PM
बाँके बिहारी मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध और पूजनीय वैष्णव मंदिरों में से एक है। यह उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद स्थित वृंदावन में स्थित है और भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप "बाँके बिहारी" को समर्पित है। "बाँके बिहारी" नाम का अर्थ है त्रिभंग मुद्रा (तीन स्थानों से मुड़ी हुई मनमोहक मुद्रा) में खड़े भगवान श्रीकृष्ण, जो अपनी दिव्य सुंदरता, मधुर मुस्कान और आकर्षक स्वरूप से भक्तों का मन मोह लेते हैं।
इस मंदिर की स्थापना वर्ष 1864 में महान संत, कृष्ण भक्त एवं प्रसिद्ध संगीतज्ञ स्वामी हरिदास जी ने की थी। मान्यता है कि स्वामी हरिदास जी की गहन भक्ति, साधना और मधुर भजन-कीर्तन से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण ने निधिवन में श्री बाँके बिहारी के दिव्य विग्रह के रूप में प्रकट होकर भक्तों को दर्शन दिए। बाद में उसी दिव्य विग्रह को वर्तमान मंदिर में विधिवत स्थापित किया गया।
बाँके बिहारी मंदिर की सबसे अनोखी विशेषता इसकी दर्शन व्यवस्था है। यहाँ भगवान के सामने लगा पर्दा (झांकी) कुछ-कुछ क्षणों के अंतराल पर बार-बार खोला और बंद किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि श्री बाँके बिहारी की मनमोहक और करुणामयी दृष्टि इतनी प्रभावशाली है कि यदि भक्त लगातार उनके दर्शन करें तो वे भगवान की दिव्य लीला में पूरी तरह तल्लीन हो सकते हैं। इसी कारण यह विशेष परंपरा सदियों से आज भी निभाई जा रही है।
प्रतिदिन भगवान बाँके बिहारी का अत्यंत भव्य श्रृंगार किया जाता है। उन्हें सुंदर एवं आकर्षक वस्त्र, बहुमूल्य आभूषण तथा ताजे पुष्पों से सजाया जाता है। दिनभर विभिन्न प्रकार की सेवाएँ, आरतियाँ और भोग अर्पित किए जाते हैं, जिनका दर्शन करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।
यह मंदिर विशेष रूप से होली, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, झूलन उत्सव, राधाष्टमी और शरद पूर्णिमा जैसे पर्वों पर अत्यंत भव्य रूप धारण कर लेता है। विशेषकर फूलों की होली यहाँ विश्वभर में प्रसिद्ध है, जिसमें भगवान पर रंगों के साथ-साथ सुगंधित पुष्पों की वर्षा की जाती है। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में एकत्र होकर भक्ति, संगीत और उत्साह के साथ इस दिव्य उत्सव का आनंद लेते हैं।
हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक बाँके बिहारी मंदिर के दर्शन के लिए वृंदावन पहुँचते हैं। मंदिर तक जाने वाली संकरी गलियाँ फूलों, प्रसाद, मिठाइयों, पूजा सामग्री और धार्मिक स्मृति-चिह्नों की दुकानों से सजी रहती हैं, जो वृंदावन की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को और भी जीवंत बनाती हैं।
आज बाँके बिहारी मंदिर ब्रज क्षेत्र की भक्ति परंपरा, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत का एक अमूल्य केंद्र है। यह मंदिर न केवल भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों के लिए आस्था का प्रमुख स्थान है, बल्कि भारतीय संस्कृति, संगीत, भक्ति और सनातन परंपरा का भी एक अद्भुत प्रतीक माना जाता है।

Free Accommodation
for devotees
Free Meals
(Annaprasadam)
Cloak Room
Facility
Laddu Prasadam
Sales
Drinking Water
Available
Wheelchair
Facility
Medical
Services
Security
24/7
Directions will be updated soon.

Vrindavan, Mathura, Uttar Pradesh
Get Directions4.5
Based on 0 reviews
May 15, 2025
Very peaceful and divine experience. The arrangements were excellent.
May 10, 2025
Darshan was smooth and well organized. A memorable spiritual visit!
May 06, 2025
A spiritual journey like no other. Will visit again.
Ayodhya, Uttar PradeshAyodhya, Uttar Pradesh
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Radha Krishna
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